विज्ञानकु : ज्ञान दीप
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रोपा था पौधा
लखेडा़जी ने तब
देख लो अब।
फूटने लगीं
उम्मीद की शाखाएं
मनभावन।
खिलने लगे
रंग-बिरंगे फूल।
विज्ञानकु के।
लगेंगे अब
मिठासभरे फल
इस पेड़ में।
रोपो तुम भी
इसी तरह पौधे
विज्ञानकु के।
तभी जलेगा
अंधेरा भगाने को
ज्ञान का दीप।
@दिनेश कुकरेती

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