विज्ञानकु मंजूषा
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वक्त जरूर लगा
इस पौधे को रोपने में
लेकिन-
जमीन में रोपते ही
फूटने लगे
इसमें अंकुर
खिलने लगी कलियां
महकने लगे फूल
झुरमुटों के बीच से
नजर आने लगे
उम्मीदों के फल
जिन्हें पहचान मिली
'विज्ञानकु' के नाम से
आज यह पौधा आज
ले चुका है
एक फूलते-फलते
वृक्ष का आकार
'विज्ञानकु मंजूषा' का रूप
इसकी सहस्र शाखाएं
देने लगी है
सुकून की छांव
इन शाखाओं को
एकटक देखते जाओ तो
प्रफुल्लित हो उठता है मन
और-
तैरने लगती है आंखों में
एक मनभावन तस्वीर
जिसमें अंकित है
सुनहरे अक्षरों में-
खूबसूरत भविष्य की ओर...
@दिनेश कुकरेती

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