विज्ञानकु : चिंतन
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विकास न हो
विनाश का कारण
करें विचार।
मिलकर हो
प्रकृति का रक्षण
यही संस्कार।
पंचतत्व हैं
धरती के रक्षक
जान लें सार।
हम सब ने
किया धरती पर
ये अत्याचार।
बचा रहे ये
आवरण धरा का
हो नवाचार।
@दिनेश कुकरेती
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