मानव की यात्रा (पांच)
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समझ गया
बीज का महत्व भी
वह धीरे-धीरे।
उगते पौधे
देखे जब उसने
फेंके बीज से।
पालने लगा
उन पौधों को वह
यत्न पूर्वक।
बनने लगे
छोटे-छोटे समूह
तब उसके।
जागा उनमें
एक-दूजे के लिए
अपनत्व।
दिखने लगा
जुदा अन्य जीवों से
आदिमानव।
बढ़ रहा था
परिवार की ओर
आदिमानव।
@दिनेश कुकरेती

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