google-site-verification: google21fa1b42aa9f945e.html VIGYANKU: मानव की यात्रा (चार)

शनिवार, 4 मार्च 2023

मानव की यात्रा (चार)


मानव की यात्रा (चार)

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पुराकाल में
बुझती न थी यह
आग कभी भी।

आदिमानव 
करता था उसकी
नित्य सुरक्षा।

कभी-कभी तो
बनती कारण वह
अग्निकांड का।

जल जाते थे
जंगल के जंगल
इस आग से।

वर्षा होती तो
वह जमीन तब
होती उर्वर।

उगते वहाँ
नए-नए पादप
कंद-मूल के।

समझ गया
तब आदिमानव
है यह आहार। 

@दिनेश कुकरेती

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