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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2023

वस्त्रों का ज्ञान


मानव की यात्रा खंड से

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वस्त्रों का ज्ञान 

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करोड़ों वर्ष

पहले जन्मी धरा

कहे विज्ञान।


चालीस लाख 

वर्ष पूर्व शायद

जन्मा मानव।


मिले हैं हमें

अनेक स्थानों पर

पुरावशेष।


हैं संभवत:

जो डेढ़ लाख वर्ष

तक पुराने।


नहीं था तब

वस्त्र पहनने का 

ज्ञान जीव को।


लपेटता था

वो छाल, खाल, पत्ते

शरीर पर।


इससे पूर्व

तो रहता था नग्न

आदिमानव।


@दिनेश कुकरेती

बुधवार, 15 फ़रवरी 2023

नमक की खोज

 


मानव की यात्रा खंड के अंश

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नमक की खोज

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इसी तरह

की आदिमानव ने

नून की खोज।


फैला हुआ था

सफेद सा पदार्थ

सिंधु तट पे।


रखा मुंह में

आदिमानव ने वो

श्वेत पदार्थ।


था नमकीन

और जायकेदार

श्वेत पदार्थ।


जान गया वो

काम का है बहुत 

खारा पदार्थ।


नून बनाने 

करने लगा संचय

सिंधु का जल।


इस तरह

मिला पहली बार 

जिह्वा को स्वाद।


@दिनेश कुकरेती

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2023

बदला जीवन



विज्ञानकु  :  मानव की यात्रा खंड के अंश

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बदला जीवन

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ग्रीष्मकाल में

भड़क उठी आग

सूखे पत्तों में।


पेडो़ं के साथ

जल गए जंगल

भुने पशु भी।


भुना मांस वो

आदिमानव को भी

लगा स्वादिष्ट।


भुना मांस ही

खाने लगा अब तो

आदिमानव।


इस आग ने

बदल दी उसकी

जीवनचर्या।


करने लगा

गुफा में भी उजाला

इस आग से।


बन रहा था

जीवों में श्रेष्ठ अब

आदिमानव।


@दिनेश कुकरेती

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2023

धरती पर विज्ञान


विज्ञानकु : धरती पर विज्ञान

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सदियों पूर्व

अग्नि के रूप में

आया विज्ञान।


प्रकटी अग्नि

जब टकरे पत्थर

एक-दूजे से।


आदिमानव

थे तब धरती पर

चतुर प्राणी।


जान गए वो

अग्नि है उपहार

उनके लिए।


सोचिए जरा

कितना अहम था

ये आविष्कार।


बढ़ने लगा

कदम-ब-कदम

आगे विज्ञान।


@दिनेश कुकरेती

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

विज्ञानकु मंजूषा


विज्ञानकु मंजूषा

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वक्त जरूर लगा

इस पौधे को रोपने में

लेकिन-

जमीन में रोपते ही

फूटने लगे 

इसमें अंकुर

खिलने लगी कलियां

महकने लगे फूल

झुरमुटों के बीच से

नजर आने लगे

उम्मीदों के फल

जिन्हें पहचान मिली

'विज्ञानकु' के नाम से

आज यह पौधा आज 

ले चुका है

एक फूलते-फलते

वृक्ष का आकार

'विज्ञानकु मंजूषा' का रूप 

इसकी सहस्र शाखाएं

देने लगी है 

सुकून की छांव

इन शाखाओं को

एकटक देखते जाओ तो

प्रफुल्लित हो उठता है मन

और-

तैरने लगती है आंखों में

एक मनभावन तस्वीर

जिसमें अंकित है

सुनहरे अक्षरों में-

खूबसूरत भविष्य की ओर...


@दिनेश कुकरेती

बुधवार, 8 फ़रवरी 2023

मानव की यात्रा (एक)


मानव की यात्रा (एक)

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अग्नि प्रकटी

पकाने लगे मांस

आदिमानव।


रहने लगे

तब आदिमानव

समूह संग।


जागी चेतना

उनमें श्रेष्ठता की

चतुर जो थे।


इसी से जगा 

परिवार का भाव

धरती पर।


गुफाद्वार को

सुरक्षित बनाया

वन्य जीवों से।


रक्षक बनी 

यही अग्नि वन में

गुफाद्वार की।


@दिनेश कुकरेती

विज्ञान चेतना


 विज्ञानकु : विज्ञान चेतना

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अंधविश्वास

बुद्धि-विवेक का जो

करे विनाश।


करे जो खत्म

समझने की शक्ति

है अंधभक्ति।


तर्क न माने 

सत्य न पहचाने

है अंधश्रद्धा।


है वो कुपढ़

पढ़-लिखकर भी

रहे जो जड़।


चेतना लाए

समझ विज्ञान की

सूझ ज्ञान की।


@दिनेश कुकरेती

VIGYANKU

विज्ञानकु की पांचवीं वर्षगांठ पर

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